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START-I, जिसने प्रत्येक पक्ष द्वारा तैनात किए जाने वाले परमाणु वॉरहेड्स और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBMs) की संख्या को क्रमशः 6,000 और 1,600 तक सीमित किया था, वर्ष 2009 में समाप्त हो गया। इसके बाद इसे पहले स्ट्रैटेजिक ऑफेंसिव रिडक्शंस ट्रीटी (SORT), जिसे मॉस्को संधि भी कहा जाता है, द्वारा और फिर न्यू START संधि द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
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न्यू START, जिसका आधिकारिक नाम “संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी संघ के बीच रणनीतिक आक्रामक हथियारों में आगे कमी और सीमा निर्धारण के उपायों पर संधि” है, 5 फरवरी 2011 को प्रभाव में आई और इसने अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक मार करने वाले परमाणु हथियारों पर नए तथा सत्यापन योग्य (verifiable) प्रतिबंध लगाए।
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दोनों देशों को 5 फरवरी 2018 तक इस संधि द्वारा निर्धारित रणनीतिक आक्रामक हथियारों की केंद्रीय सीमाओं को पूरा करना था और संधि की अवधि तक उन सीमाओं के भीतर बने रहना था। बाद में अमेरिका और रूसी संघ ने इस संधि को 4 फरवरी 2026 तक बढ़ाने पर सहमति जताई।
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अमेरिकी विदेश विभाग (US Department of State) की वेबसाइट पर उपलब्ध न्यू START से संबंधित जानकारी के अनुसार, वे केंद्रीय सीमाएँ जिन्हें अमेरिका और रूस ने 5 फरवरी 2018 तक पूरा किया और तब से उनका पालन कर रहे हैं, निम्नलिखित हैं:
700 तैनात अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs), तैनात पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलें (SLBMs) तथा परमाणु हथियारों से लैस तैनात भारी बमवर्षक विमान;
1,550 परमाणु वॉरहेड्स (तैनात ICBMs, तैनात SLBMs और परमाणु-सज्जित तैनात भारी बमवर्षकों पर)। इस सीमा की गणना में प्रत्येक भारी बमवर्षक को एक वॉरहेड के रूप में गिना जाता है;
800 तैनात और गैर-तैनात ICBM लॉन्चर, SLBM लॉन्चर तथा परमाणु हथियारों से लैस भारी बमवर्षक।।
7. यूक्रेन युद्ध के कारण रिश्तों में आई जटिलताओं के चलते, न्यू START संधि के नवीनीकरण को लेकर मॉस्को और वॉशिंगटन के बीच अब तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हो सकी है।
नगेट से आगे: परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty – NPT)
1. वर्ष 1968 में हस्ताक्षरित और 1970 में लागू हुई यह अंतरराष्ट्रीय संधि परमाणु हथियारों और तकनीक के प्रसार को रोकने, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देने तथा निरस्त्रीकरण (Disarmament) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
2. यह संधि परमाणु राज्य को ऐसे देश के रूप में परिभाषित करती है, जिसने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु हथियार या किसी अन्य परमाणु विस्फोटक उपकरण का निर्माण और परीक्षण किया हो। इस श्रेणी में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, सोवियत संघ (बाद में रूस) और चीन आते हैं।
3. अब तक 191 देश इस संधि से जुड़ चुके हैं। भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था, लेकिन उसने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। इसके बजाय भारत ने परमाणु अप्रसार के लिए सार्वभौमिकता (Universality) के सिद्धांत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी पाँच सदस्यों (P5) के लिए किए गए अपवादों और उनके अनुरूप तय की गई कट-ऑफ तिथि के कारण इस संधि की भेदभावपूर्ण होने के रूप में आलोचना की जाती रही है।
(a) यह अमेरिका (USA) और रूसी संघ (Russian Federation) के बीच एक द्विपक्षीय रणनीतिक परमाणु हथियार कटौती संधि है।
📌 Explanation (UPSC angle):
New START एक bilateral nuclear arms control treaty है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों और उनके डिलीवरी सिस्टम की संख्या को सीमित करना है।
(d) यह BRICS देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए किया गया कोई बहुपक्षीय सहयोग समझौता नहीं है।
📌 स्पष्टीकरण (UPSC दृष्टिकोण से):
New START संधि केवल अमेरिका और रूस के बीच की एक द्विपक्षीय रणनीतिक परमाणु हथियार नियंत्रण संधि है। इसका BRICS, व्यापार सहयोग या आर्थिक समझौतों से कोई संबंध नहीं है।