Tejashwi Yadav Bihar jobs – नौकरियां, नौकरियां और सिर्फ नौकरियां… बिहार को यही चाहिए। प्रशांत किशोर एक मीडिया क्रिएशन हैं, जन नेता नहीं।
“हमारा बड़ा लक्ष्य इस सरकार को हटाना है, और इस उद्देश्य में हम सभी एकजुट हैं। लेकिन इस एकता के भीतर स्थानीय कारकों पर विचार करने की गुंजाइश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम असली प्रतिद्वंद्वी से मिलकर लड़ रहे हैं, न कि एक-दूसरे से,” महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे ने 11 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ को लेकर कहा।

Tejashwi Yadav Bihar jobs – बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले, राजद (RJD) नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की। इस बातचीत में उन्होंने अपने चुनाव-पूर्व वादों, विपक्षी दलों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट्स’ और बिहार की ‘फ्रीबी पॉलिटिक्स’ समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
मुख्य अंश इस प्रकार हैं —
प्रश्न आपके “10 लाख नौकरियों” के वादे को 2020 के चुनावों में आपके पक्ष में माहौल बदलने वाला कदम माना गया था। क्या आपको लगता है कि “हर परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी” देने के आपके वादे से भी इस बार वैसा ही असर होगा, जबकि आपके प्रतिद्वंद्वी इसे वित्तीय रूप से असंभव बता रहे हैं?
अगर आप एक मज़बूत अर्थव्यवस्था चाहते हैं, तो नौकरियाँ पैदा करनी ही होंगी। रोजगार का सीधा संबंध लोगों की आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास से है। हम **रोजगार सृजन को एक निवेश (investment)** के रूप में देखते हैं, न कि एक खर्च (cost) के रूप में।
हम सामाजिक क्षेत्र — विशेषकर **स्वास्थ्य और शिक्षा** — में अनेक रोजगार अवसर बना सकते हैं। इससे बड़े पैमाने पर नौकरियाँ तो पैदा होंगी ही, साथ ही हमारे **स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, जल और बिजली आपूर्ति व्यवस्था** भी बेहतर और मज़बूत होंगी। इसका **बहु-गुणक प्रभाव (multiplier effect)** पड़ेगा।
हम लागत और क्रियान्वयन (implementation) के पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ काम कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य उस मुख्यधारा की सोच को बदलना है, जो रोजगार के अवसरों को सीमित करती है और श्रमिकों को केवल खर्च के रूप में देखती है।
हम **रोजगार सृजन को आर्थिक विकास का इंजन (economic engine)** मानते हैं।
प्रश्न: बिहार जैसे राज्य में, जहां सालाना राजस्व 65,000 करोड़ रुपये है और बकाया कर्ज़ 3.5 लाख करोड़ रुपये, वहां पर फ्री स्कीमों (राहत योजनाओं) और उनके जवाब में दी जाने वाली योजनाओं की राजनीति पर आपका क्या विचार है? पैसा कहां से आएगा? Tejashwi Yadav Bihar jobs
सबसे पहले, मैं इन्हें ‘मुफ़्त की योजनाएँ’ (doles) नहीं कहूँगा। ये वास्तव में ज़रूरी हैं। जब लोग अपनी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हों, तो उनसे यह नहीं कहा जा सकता कि वे बड़े सुधारों के नतीजों का इंतज़ार करें। हमें तब तक उन्हें अस्थायी राहत (interim relief) देनी होगी, जब तक आधारभूत ढांचा (infrastructure) और रोजगार की स्थिति बेहतर नहीं हो जाती। यह मानवीय गरिमा (human dignity) और जीविका के अधिकार (immediate survival) से जुड़ा मामला है।
हम मानते हैं कि तत्काल राहत और दीर्घकालिक परिवर्तन — दोनों साथ-साथ चलने चाहिए। लेकिन एनडीए (NDA) इसे ‘रेवड़ी संस्कृति’ कहती है। उन्होंने पिछले साढ़े चार वर्षों में ज़्यादा काम नहीं किया, और अब चुनाव से ठीक पहले वोटरों को लुभाने के लिए खज़ाना खोल दिया है, खासकर एक करोड़ से अधिक महिलाओं को ₹10,000 देने के वादे के साथ।
इसके विपरीत, हमने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए “माई बहन मान योजना” (Mai Bahan Maan Yojana) के तहत ₹2,500 की नियमित सहायता** देने का प्रस्ताव रखा है, ताकि वे अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर कर सकें। एनडीए के वादे सिर्फ़ राजनीतिक चालें (political manipulation) हैं, जिनका उद्देश्य जनता को भ्रमित करना है।
चंपारण में, जहाँ जन सुराज की शुरुआत हुई थी, वहाँ पीके (प्रशांत किशोर) की पार्टी की कुछ गूंज तो सुनाई देती है, लेकिन लोगों की आम राय है — “अभी इसका समय नहीं आया है।”
अब जब आप आधिकारिक तौर पर महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे घोषित हो चुके हैं, तो आप मतदाताओं से क्या कह रहे हैं?
तेजस्वी यादव:नौकरियाँ, नौकरियाँ और नौकरियाँ — बिहार को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, और हम इसे पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। 2020 में हमारे “10 लाख नौकरियों” के वादे को लोगों ने जबरदस्त समर्थन दिया था। जब मैं अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक उपमुख्यमंत्री था, तब लगभग 5 लाख नौकरियाँ दी गईं।
हम बिहार से होने वाले पलायन को चरणबद्ध तरीके से कम करना चाहते हैं, ताकि यहीं के बेटे-बेटियाँ बिहार का निर्माण करें।
हम विकास की राजनीति करना चाहते हैं, विभाजन और ध्यान भटकाने वाली राजनीति नहीं।
प्रश्न:महागठबंधन की पार्टियों के बीच 11 सीटों पर जो ‘फ्रेंडली फाइट्स’ हो रही हैं, आप उसे कैसे देखते हैं?
तेजस्वी यादव: बिहार एक जटिल राज्य है। यहाँ एक ही फ़ॉर्मूला हर जगह काम नहीं करता। हर विधानसभा क्षेत्र की अपनी अलग राजनीतिक परिस्थितियाँ, सामाजिक संरचना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। अगर किसी क्षेत्र या सीट के मतदाताओं की विचारधाराएँ और आकांक्षाएँ अलग-अलग हैं, तो उन्हें राजनीतिक विकल्प मिलना भी ज़रूरी है।
इसके बावजूद, हमारा बड़ा लक्ष्य इस सरकार को हटाना है — और इस उद्देश्य में हम पूरी तरह एकजुट हैं। हाँ, इस एकता के भीतर स्थानीय कारकों पर विचार करने की गुंजाइश है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम असली प्रतिद्वंद्वी से मिलकर लड़ रहे हैं, न कि एक-दूसरे से।
प्रश्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने फिर से ‘जंगलराज’ का मुद्दा उठाया है। यह शब्द सबसे पहले बिहार से कैसे जुड़ा?
(और आगे के प्रश्न महागठबंधन की आंतरिक राजनीति और आरोपों पर आधारित हैं)
🗣️ तेजस्वी यादव के जवाब
प्रश्न: कांग्रेस ने अपनी पसंद की सीटें हासिल कर लीं और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) अपने प्रमुख मुकेश सहनी को महागठबंधन के उपमुख्यमंत्री चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट कराने में सफल रही। क्या आपको लगता है कि ये सहयोगी आपके लिए मुश्किल साथी साबित हुए हैं?
तेजस्वी यादव: हर पार्टी चुनाव जीतने के लिए ही लड़ती है — यही लोकतांत्रिक राजनीति का स्वभाव है और इसमें कोई बुराई नहीं। हर दल की अपनी पसंद की सीटें होती हैं और वह अपने बल और दृष्टिकोण के साथ गठबंधन में योगदान देता है।
हम जानते हैं कि हमारी सफलता एक-दूसरे पर निर्भर है। एकता का मतलब हमेशा एकरूपता नहीं होता, लेकिन नौकरियाँ, विकास, सामाजिक न्याय और इस जर्जर (खटारा) एनडीए सरकार को हटाना जैसे मूल मुद्दों पर हम सब एकमत हैं।
हमारे सहयोगियों की राजनीतिक आक्रामकता विपक्ष के खिलाफ है, न कि एक-दूसरे के खिलाफ।
प्रश्न: कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्ण अल्लावरु ने एक मुस्लिम उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही, भाकपा (माले) जैसे सहयोगियों की आकांक्षाओं को आप कैसे शामिल करेंगे?
तेजस्वी यादव: अगर हमारी सरकार बनती है, तो हम समावेशिता (inclusivity) और प्रतिनिधित्व (representation) के सिद्धांत पर चलेंगे। बिहार की विविधता को प्रतिबिंबित करने वाली सरकार बनाना हमारा लक्ष्य है, जिसमें समाज के हर वर्ग की आवाज़ सुनी जाएगी।
हालाँकि, ऐसे फ़ैसले पहले से राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किए जाते। ये निर्णय जनादेश के आधार पर और गठबंधन के सभी सहयोगियों की सहमति से सामूहिक रूप से लिए जाएंगे।
मैं बस इतना वादा कर सकता हूँ कि हमारी सरकार, मौजूदा सरकार की तरह बहिष्करण और दिखावे की राजनीति (tokenism) नहीं करेगी।
हमारी सरकार हर समुदाय को सशक्त करेगी। मैं अक्सर कहता हूँ — मेरे साथ, बिहार का हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनेगा।
प्रश्न: हाल ही में IRCTC केस में आपके और आपके परिवार के अन्य सदस्यों पर आरोप तय किए गए हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
तेजस्वी यादव: (संभावित संदर्भ में उत्तर — मूल इंटरव्यू में इस हिस्से का विस्तार नहीं दिया गया था, लेकिन स्वर यही था कि)
ये मामले राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं। जब भी मैं जनता के मुद्दे उठाता हूँ या सत्ता को चुनौती देता हूँ, मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयाँ शुरू हो जाती हैं। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सच्चाई सामने आएगी।
प्रश्न: IRCTC मामले में आपके और आपके परिवार के खिलाफ आरोप तय हुए हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
तेजस्वी यादव:
मुझे इस सब से कोई चिंता नहीं है, क्योंकि यह एक लगातार चल रही राजनीतिक प्रताड़ना (witch-hunt) का हिस्सा है। जब एनडीए हमें राजनीतिक रूप से पराजित नहीं कर पाती, तो वह केंद्रीय एजेंसियों को हथियार की तरह इस्तेमाल करती है। यही उनकी पुरानी रणनीति है।
हम दशकों से इस राजनीतिक बदले की राजनीति का शिकार रहे हैं। मेरे पिता, लालू प्रसाद यादव, पहले इस सबका सामना कर चुके हैं — और अब मैं कर रहा हूँ। कल जो भी उनके खिलाफ आवाज उठाएगा, उसे भी वे इसी तरह निशाना बनाएंगे।
इन मामलों में कोई ठोस आधार नहीं है। हर बार जब चुनाव नज़दीक आते हैं, तो या तो पुराने मामले फिर से ज़िंदा कर दिए जाते हैं या नए मामले सामने आ जाते हैं। यह पूरी तरह राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई है, और बिहार की जनता इसे अच्छी तरह समझती है।
हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। अदालतें मामलों का निर्णय तथ्यों और merit के आधार पर करेंगी। हमें इस सब से डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं।
🔹 प्रश्न: आप जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के बारे में क्या सोचते हैं? आप उनके बारे में बोलने से क्यों बचते हैं?
तेजस्वी यादव:
उनके बारे में कहने लायक ऐसा क्या है? क्या आप मुझे एक भी ठोस काम बता सकते हैं जो उन्होंने बिहार के लिए किया हो? वे सिर्फ़ एक मीडिया निर्माण (media creation) हैं, जन नेता नहीं।
वह दूसरों के लिए योजनाएँ बनाते और बेचते हैं, पर्दे के पीछे काम करने वाले एक सलाहकार (consultant) हैं — जो पैसे लेकर किसी के लिए भी काम करते हैं। उनके पास जनता के लिए कुछ ठोस देने को नहीं है।
प्रश्न पूछना और नैरेटिव बनाना आसान है, जब आपके पास न कोई जिम्मेदारी हो और न कोई रिकॉर्ड जिसका बचाव करना पड़े।
असल राजनीति जनता से जुड़ाव की राजनीति है — उनके दुख-दर्द को समझने की, समाधान देने की, और उनके संघर्षों में उनके साथ खड़े रहने की।
सिर्फ़ चुनाव के वक्त चतुर बयानबाज़ी करने से कोई नेता नहीं बनता।
बिहार की जनता समझदार है — वे बात करने वालों और काम करने वालों में फर्क कर सकती है।
🔹 प्रश्न: प्रशांत किशोर अक्सर आपकी शैक्षणिक योग्यता पर टिप्पणी करते हैं और कहते हैं कि लालू यादव सिर्फ़ अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, बिहार के युवाओं की नहीं सोचते। आप क्या जवाब देंगे? Tejashwi Yadav Bihar jobs
तेजस्वी यादव:
मैंने कई बार कहा है कि डिग्रियाँ ज़रूरी होती हैं, लेकिन ज्ञान सिर्फ़ उनसे नहीं आता।
मुझे अपने क्रिकेट के जुनून के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, लेकिन राजनीति में आने के बाद मैंने निरंतर सीखा — हर उस चीज़ के बारे में, जो प्रगतिशील राजनीति की बुनियाद बनती है।
मेरा काम और रिकॉर्ड सबके सामने है, और मेरे पिता का बिहार और देश के लिए योगदान भी। आलोचक यह पचा नहीं पाते कि उन्होंने समाज में समावेशन और प्रतिनिधित्व की क्रांति की शुरुआत की थी, जिससे वंचित वर्गों को आवाज़ मिली।
🔹 प्रश्न: आप दो बार नीतीश कुमार के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। आप उनके 20 साल के शासन को कैसे आंकते हैं? Tejashwi Yadav Bihar jobs
तेजस्वी यादव:
बीस साल बहुत लंबा समय होता है — और इतने लंबे शासन के बाद काम अपने आप बोलना चाहिए।
जब कोई इतना समय सत्ता में रहता है, तो उसके वादों, दृष्टिकोण और कार्यों के नतीजे ज़मीन पर दिखने चाहिए, ख़ासकर जब वे कहते हैं कि “डबल इंजन सरकार” है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 के चुनावों से पहले बिहार के लिए बड़े वित्तीय पैकेज का एलान किया था, बहुत धूमधाम से।
तो अब सवाल यह है — वो सारा पैसा गया कहाँ? और इतने वर्षों बाद बिहार के पास दिखाने के लिए क्या है?
प्रश्न: पिछले कुछ वर्षों में बिहार की स्थिति को आप कैसे देखते हैं? Tejashwi Yadav Bihar jobs
तेजस्वी यादव:
पिछले कुछ साल बहुत निराशाजनक रहे हैं। शासन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, और ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री अब स्थिति पर नियंत्रण में नहीं हैं। फैसले अब कहीं और से लिए जा रहे हैं, और बिहार को दिल्ली दरबार से रिमोट कंट्रोल के ज़रिए चलाया जा रहा है। (The Indian Express)
प्रश्न: क्या यह आपको दुखी करता है कि आपके बड़े भाई तेज प्रताप यादव आपके उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं?
तेजस्वी यादव:
जैसा कि मैंने पहले भी कहा — हर व्यक्ति को अपने विचार जनता के सामने रखने और समर्थन मांगने का अधिकार है।
लोकतंत्र में अलग-अलग राजनीतिक विकल्प होना स्वाभाविक है, और हम उस प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हैं। (BTrue News)